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शारदा परीक्षणों में ममता की मुश्किलें बढ़ीं: सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई का दावा- लेखक में घिरी कंपनी में सैलरी सीएम रिलीफ फंड से बांटी गई


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नई दिल्ली2 घंटे पहले

शारदा चिटफंड स्कला 2,460 करोड़ रुपये तक का होने का अनुमान है। इसकी जांच आईपीएस राजीव कुमार (दाएं) ने की थी। -फाइल फोटो।

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि बंगाल में मुख्यमंत्री राहत कोष (मुख्यमंत्री राहत कोष) के पैसे से मताधिकार में फंसी तर टीवी के कर्मचारियों को सैलरी दी गई। इस फंड से 23 महीने तक कर्मचारियों की सैलरी का पैसा निकाला गया। सरकारी फंड से प्राथमिक कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी देने का यह पहला मामला है।

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि मई 2013 से लेकर अप्रैल 2015 के बीच तार टीवी के कर्मचारियों की सैलरी के लिए हर महीने सीएम रिलीफ फंड से 27 लाख रुपए दिए गए। इस दौरान तर टीवी एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन को 6.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में और जांच जारी है।

CBI ने कोर्ट में क्या कहा?

  • CBI ने कहा कि कोलकाता हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को कंपनी के फंड से सैलरी देने को कहा था, लेकिन बंगाल सरकार ने CM रिलीफ फंड का पैसा दे दिया।
  • मुख्यमंत्री राहत फंड में जनता की तरफ से आपदा और दूसरी इमरजेंसी के लिए राशि दान की जाती है। इसका इस्तेमाल सैलरी के लिए कर लिया गया।
  • इस मामले में आगे जांच के लिए पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने आधे अधूरे दस्तावेज ही मुहैया कराए।

कोलकाता के पूर्व पुलिस चीफ की गिरफ्तारी की मांग
सीबीआई ने ममता के करीबी और कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी की मांग भी की। राजीव कुमार को पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट से जमानत मिली थी। अब सीबीआई ने कोर्ट में कहा है कि राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी जरूरी है।

राजीव कुमार ने ही की कार्यशालाओं की जाँच की
शारदा चिटफंड कार्यशाला की प्रारंभिक जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने जिस पर SIT का गठन किया था उसमें राजीव कुमार शामिल थे। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे चिटफंड मामलों के साथ शारदा प्रकाशन की जांच भी सीबीआई को सौंप दी थी।

टीएमसी के कई नेता शारदा जांच में फंसे हैं
शारदा चिटफंड के डायरेक्टर्स सुदीप्त सेन, देबजानी मुखर्जी सहित TMC के कई नेता इस लेखन में फंसे हुए हैं। सीबीआई का कहना है कि राजीव कुमार ने टॉप टीएमसी प्रमुखों और शारदा चिट फंड्स के डायरेक्टर्स को बचाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने कॉल रिकॉर्ड डेटा के साथ छेड़छाड़ कर सबूत मिटाने का काम किया।

2460 करोड़ का है शारदा चिटफंड स्कैला
शारदा चिटफंड ग्रुप ने पश्चिम बंगाल में कई फेक स्कीम्स चलाई थे, जिसमें कथित तौर पर लाखों लोगों के साथ फ्रॉड गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया है। ये तीन स्कीम थे- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट।

इस अनुबंध के 2,460 करोड़ रुपये तक का होने का अनुमान है। 2013 में जब इसका खुलासा हुआ, तो लोगों के करोड़ों रुपए डूब गए। उसी वर्ष प्रोमोटर सुदीप्त सेन को गिरफ्तार कर लिया गया। पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 80 फीसदी जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया गया है।





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