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सजा काला पानी की: दाए बीघा में निजी डैम बना पानी बचाने के लिए सिंचाई के लिए पानी मिले, लेकिन चिप्स का के स्टार्च से पानी काला पड़ा था।


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  • दा बिगहा में, निजी बांधों को पानी बचाने के लिए बनाया गया था ताकि सिंचाई के लिए पानी हो, लेकिन चिप्स कारखानों के स्टार्च ने पानी को काला बना दिया।

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महू32 मिनट पहले

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गर्मी में खेती के लिए पानी मिले इसलिए दाए बीघा जमीन पर किसान ने डैम बनाया। अभी इसमें भरपूर पानी है लेकिन चिप्स फैक्टरीें के प्रदूषण से पानी काला पड़ा है।

आलू-चिप्स कारखानाें के प्रदूषण से अब पातालपानी राड पर बाेरखेड़ी गांव के किसानों के काले पानी की सजा भुगतना पड़ रहा है। यहां बाेरखेड़ी में दाे बीघा जमीन पर किसान ने निजी डैम बनाया है, जिससे फसल की सिंचाई के लिए पानी मिल सके लेकिन आसपास के चिप्स पानी से बहाए स्टार्च से डैम का पानी काला हाे गया है। जिससे यह पानी खेती के लिए उपयागेग में नहीं आ रहा है। इस कारण से आसपास के क्षेत्र में प्याज, लहसुन व सफेद मूसली की खेती पर संकट गहरा गया है।

यहां बाेरकेड़ी में प्याज व सफेद मूसली की खेती करने वाले किसान पुरूषातेतम पाटीदार ने बताया की उन्हाेंने दाे साल पूर्व करीब 25 लाख रु। खर्च कर निजी डैम बनाया गया था। जिससे आसपास के किसान isunchai के लिए पानी ले रहे थे। इस वर्ष भी डैम में भरपूर पानी है, लेकिन यह खेती के उपयागेग नहीं आ रहा है। इसकी वजह यहां आसपास के चिप्स फैक्ट्री से बहाया स्टार्च और प्रदूषित पानी है।

जिससे डैम के पानी का रंग काला पड़ गया है। वहाँ पानी झागदार व बदबूदार हाे गया है। अब डैम से पानी नहीं मिलना से वर्तमान में उनकी शुरु प्याज और सफेद मूसली की फसल पर संकट गहरा गया है। अगर पानी नहीं मिला तोे यह फसल पूरी तरह बर्बाद हाे जाएगी। इसके अलावा भी अन्य किसान रामलाल पाटीदार व माखनलाल पाटीदार जाे इस डैम से पानी लेते थे उन्होंने बताया कि पानी नहीं मिलना से लहसुन की फसल पूरी हाेने की कगार पर है।

पानी काला होने से सफेद मूसली की खेती पूरी की कगार पर

किसान पाटीदार ने बताया कि इस सीजन में उन्हाेंने सफेद मूसली, प्याज और लहसुन की खेती की है। ये सभी खेती के लिए वह पानी अपने डैम से ही लेते हैं। सफेद मूसली की लगभग 30 लाख की फसल पक कर तैयार है। जिसकाई निकालने के लिए पानी की जरूरत है। लेकिन डैम का पानी काला हाेने से फसल काे नहीं दे सकता। जिसके कारण पकी फसल नहीं निकालें से पूरी फसल बर्बाद हाेने की आशंका है। इसके बारे में सीएम हेल्पलाइन सहित स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियाें काे भी शिकायत की है।

और … सरकारी तालाब का पानी भी हाे गया

पाटदार ने बताया कि गांव में ही सरकारी तालाब का पानी भी चिप्स के कारखाने से निकलले स्टार्च और प्रदूषित पानी से काला हाे गया है। इस तालाब के आसपास भी बड़ी संख्या में व्हानाें ने प्याज व लहसुन की फसल ले रखी है, लेकिन वह भी इस तालाब का पानी काला हाेने के बाद इसके उपयाेग नहीं कर पा रहे हैं।

नमेदाराएँ ने प्रदूषण राेकने काे बारे में केई पहल नहीं की – चिप्स से काेदरिया, मलेंडी, गुजरखेड़ा, बाकरखेड़ी, सांतेर आदि जगह पर नदी व तालाब का पानी काला हाे रहा है। वहीं मंदिराें में प्रतिमाएं व शिखर कलश भी काले पड़ रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद अब तक लाशेदाराें ने प्रदूषण राेकने काे बारे में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है।

जाँच के लिए कहा गया है

जो भी कारखाने प्रदूषित पानी नदी में बहा रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण विभाग को भी जांच के लिए कहा है।

-अभिलाष मिश्रा एसडीएम महू

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