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सांसद विधानसभा का लाइव टेलीकास्ट क्यों नहीं ?: सदन की कार्यवाही लाइव करने का प्रस्ताव 2 साल से कागजों में, छग में ‘माननीयों’ के सवाल-जवाब टीवी पर देखती-सुनती है जनता


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  • हाउस लाइव की कार्यवाही करने का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ में दो साल से कागजों पर है, जो वर्ष 2000 में अस्तित्व में आया था, ‘माननीय’ लोगों के सवाल और जवाब टीवी पर सुनाए और सुने गए।

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भोपाल2 घंटे पहले

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मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। कोरोना संक्रमण के बढ़ने के कारण मीडिया की एंट्री को सीमित किया गया है।

  • विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम ने दिया सकारात्मक संकेत; प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा- दूरदर्शन से लाइव कराने का प्रस्ताव तैयार है, नए स्पीकर के समक्ष रखेंगे
  • लोकसभा टीवी की तर्ज पर स्टूडियो बनाने की डीपीआर पूर्व अध्यक्ष डाॅ। सीतासरण शर्मा के कार्यकाल में बनी थी, न सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई

मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। कोरोना संक्रमण के फिर से बढ़ने के कारण मीडिया की एंट्री को सीमित किया गया है लेकिन सवाल यह है कि लोकसभा-राज्यसभा और कई राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण हो सकता है तो फिर मध्यप्रदेश में क्यों नहीं?

सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा में दिए गए की वीडियाे रिकाैडिंग के लिए लिखित में आवेदन देकर लेना पड़ा था। हालांकि विधानसभा की नियमावली में ऐसा प्रावधान है कि यदि किसी सदस्य को वीडियो रिकाॅडिंग की जरूरत पड़ जाए तो आवेदन करने पर विधानसभा सचिवालय उपलब्ध कराएगा।

दिल्ली विधानसभा में पूरे सत्र की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाता है। इतना ही नहीं, वर्ष 2000 में अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ में ‘माननीयों की सरकार से सवाल-जवाब प्रदेश की जनता देखती और सुनती है। जनता के नुमाइंदे अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं या नहीं? यह पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से सामने आता है। रेज में तो विधानसभा सदन की कार्यवाही का बकायदा YouTube लिस्ट जारी होता है।

मध्यप्रदेश विधानसभा के गठन को 65 साल हो गए। इस अवधि में कई परिवर्तन भी हुए। विधायकों के सवाल लगाने से लेकर सरकार के जवाब तक ऑनलाइन हो गए। पहली बार प्रदेश का बजट पेपरलेस यानी ऑफलाइन होगा लेकिन सदन की कार्यवाही को लाइव करने में माननीयों की कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई देती। कांग्रेस हो या फिर बीजेपी, किसी भी विधायक ने पुरजोर तरीके से इस मामले को कभी नहीं उठाया। इसकी पुष्टि विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसराणी ने की।

इसराणी के 14 वें विधानसभा (वर्ष 2013 से 2018 तक) में अध्यक्ष डाॅ। सीतासरण शर्मा के कार्यकाल में लोकसभा और राज्यसभा टीवी की तर्ज पर स्टूडियो से लेकर सदन की कार्यवाही का लाइव प्रसारण तक का एक प्लान तैयार किया गया था, लेकिन इसमें सत्ता और विपक्ष किसी ने भी दिलचस्पी नहीं ली। दरअसल, इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अनुमति लेना पड़ती है लेकिन विधानसभा से प्रस्ताव ही नहीं पाया जा रहा है।

इधर, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही को लाइव करने के लिए दूरदर्शन को प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन तकनीकी समस्या आने से यह आगे नहीं बढ़ पाया। पिछले वर्ष को विभाजित के कारण सत्र आहूत नहीं हो पाया था। अब नए अध्यक्ष के समक्ष इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। हालांकि अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा है कि इसको लेकर जल्दी ही निर्णय लिया जाएगा, ताकि मीडिया के साथ साथ प्रदेश की आम जनता विधानसभा के अंदर हो रही कार्यवाही देख और सुन सके।

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