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सिक्योरिटी गार्ड से मिला सामान: हैदराबाद के रामू दोसापटी जरूरतमंदों की मदद के लिए गए थे राइस एटीएम, 25,000 परिवारों को राशन बैंडिंग के लिए 50 लाख खर्च किए


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एक घंटा पहले

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  • इस काम में रामू की पत्नी ने उसका पूरा साथ दिया। चौबीस घंटे चलने वाले इस एटीएम बैंक से कोई खाली हाथ नहीं जाता
  • रामू को ये लगा कि जब 6000 कमाने वाला एक व्यक्ति मजदूरों की मदद के लिए 2000 खर्च कर सकता है तो मैं क्यों नहीं

इस साल ऐसे कई लोग चर्चा में रहे जिन्होंने अपनी सेवाभाव से दुनिया भर में नाम कमाया। इनमें से कुछ ऐसे थे जो दूसरों की सेवा करने में आर्थिक रूप से सक्षम थे, जबकि कुछ वे भी जो खुद पैसों की तंगी उठा कर भी जरूरतमंदों की मदद की जरूरत थे। ऐसे ही नेक लोगों में शामिल हैं हैदराबाद के रामू दोसापटी। वे एक इंजीनियरिंग कंपनी में एचआर हैं और हैदराबाद में 24 घंटे राइस एटीएम चलाकर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। वे अब तक 50 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं जिसमें उनके प्रोविडेंटेंड फंड का पैसा भी शामिल है।

उन्होंने हैदराबाद के एलबी नगर में राइस अटम की शुरुआत की। उन्हें जरूरतमंदों को मुफ्त में राशन बांटेते हैं। उनके इस एटीएम का फायदा हर रास लगभग 200 से 300 परिवारों को मिलता है। अब तक वे 25,000 परिवारों की मदद कर चुके हैं। जब उनसे पूछा जाता है कि यह काम की शुरुआत कैसे हुई तो वे बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान एक दिन वे घर के पास बनी हुई दुकान में अपने बच्चों के लिए चिकन खरीदने गए।

उस दुकान में एक सिक्योरिटी गार्ड 2000 का चिकन खरीद रहा था। रामू ने उस गार्ड से जब इतना सारा चिकन खरीदने की वजह पूछी तो उसने बताया कि वह प्रवासी मजदूरों को खिलाने के लिए चिकन खा रहा है। जब रामू ने उनकी सैलेरी पूछी तो उन्होंने बताया कि मैं 6000 रुपए महीने कमाता हूं।

रामू को ये लगा कि जब 6000 कमाने वाला एक व्यक्ति मजदूरों की मदद के लिए 2000 खर्च कर सकता है तो मैं क्यों नहीं। रामू वही जब सिक्योरिटी गार्ड के साथ उन 192 मजदूरों के पास गया और उनकी मदद का वादा किया। अपनी बचत के डेढ़ लाख रुपये ने इन ज़रूरतमंदों के लिए राशन खरीदने में खर्च किए दिए।

अपनी बचत के पैसे खर्च करने के बाद रामू ने प्रोविडेंट फंड से 50 लाख निकाले। रामू ने बताया कि अभी वह 1 बीएचके फ्लैट में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है। उन्होंने 3 बीएचके फ्लैट लेने के लिए जो पैसे जमा किए थे, वे भी गरीबों के लिए राशन खरीदने में लगा दिए गए। इस काम में रामू की पत्नी ने उसका पूरा साथ दिया। चौबीस घंटे चलने वाले इस एटीएम बैंक से कोई खाली हाथ नहीं जाता।





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