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सेना की ताकत में इजाफा, सिगसौर असॉल्ट राइफल के बाद अब नेगेव एनजी -7 एलएमजी होगा


6000 मशीन गन की पहली खेप भारत में आ गई है। (तस्वीर विकीपीडिया से साभार)

अब एलएएसी और एलओसी पर तैनात जवानों को नेगेव एनजी -7 एलएमजी मिलेगा। इमरजेंसी खरीद के तहत ये गन इजरायल से ली गई है। ये बंदूक जवानों को इस महीने के अंत तक मिल जाएगी।

नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन और एलओसी पर पाकिस्तान के साथ माहौल भले ही आजकल शांत हो लेकिन ये दोनों देश ऐसे हैं जिन पर ज्यादा दिनों तक भरोसा नहीं किया जा सकता है। भारत अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध चाहता है लेकिन अपने ऊपर किसी तरह के बाहरी खतरे की कीमत पर नहीं। यही कारण है कि चीन और पाकिस्तान को सबक सीखने के लिए एलएसी और एलओसी पर सैनिकों को नए हथियार दिए जा रहे हैं।

पहले सैनिकों को अमेरिका की बनाए असंगत रायफल सिगसौर दी गई तो अब अनुमतिरायल की बनी लाइट मशीन गन नेगेव एनजी -7 देने की तैयारी है। सेना के सूत्रों की मानें तो इस महीने के अंत तक ये लाइट मशीन गन की डेप्लॉयमेंट शुरू हो सकती है। 6000 मशीन गन की पहली खेप भारत में आ गई है।

19 मार्च 2020 को अनुमतिरायल की कंपनी से हुआ था
जनवरी के पहले सप्ताह में ही मुंबई में इसकी पहली खेप आती ​​ही उन्हें सन्तेरल ऑर्डिनेन्स डिपो जबलपुर मिला। सेना के सूत्रों की मानें तो इस गन का पोस्टल ट्रायल अपने अंतिम चरण पर है और जल्द ही इसे नॉर्दर्न, इस्टर्न और वेस्टर्न एमई पर तैनात सैनिकों को सौंप दिया जाएगा। इस मशीन गन का सौदा 19 मार्च 2020 को अनुमतिरायल की कंपनी से हुआ था। कुल 16476 गन खरीद का करार हुआ था। जिनमें से 6000 गन सेना को मिल चुके हैं। मार्च 2022 तक बाकी गान भारत को मिल जाएगा।मारक क्षमता जितनी सटीक है उतनी ही घातक भी है

इस LMG की खास बात ये है कि इसकी मारक क्षमता जितनी सटीक है उतनी ही घातक भी है। NG-7 गान की रेंज 800 मीटर है और इससे 700 गोलियां प्रति मिनट दागी जा सकती हैं। इस मशीन गन में एक बार में 150 से 200 गोलियां आती हैं और इस एलएमजी की खास बात ये है कि एब बार राउंड खत्म होने के बाद महज कुछ ही सेकंड में नया राउंड लगाया जा सकता है।

नेगेव का वजन 7.5 किलो है और इसे गाड़ियों और हैलिकॉप्टर से भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। यही नहीं इस गन का रिकायल भी बहुत कम है। भारतीय सेना के लिए लाइट मशीन गन खरीदने के लिए बाकायदा एक टीम ने साल 2019 में तीन देशों में, दक्षिण कोरिया और इजरायल का दौरा किया था। उसके बाद इस हथियार को गय ने चुना। NG-7 LMG से भारतीय सेना मौजूद इंसास LMG को संशोधित करेगी।

सेना को करीब 40 हजार से ज्यादा गान की जरूरत है
भारतीय सेना को करीब 40 हजार से ज्यादा गन की जरूरत है। बाकी बची 70 फासदी गन को मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाना है। भारतीय सेना इस वक्त बदलाव के दौर से गुजर रही है और पुराने हो चले हथियारों को नया, और नकली हथियारों से बदला जा रहा है। हाल ही में सेना ने अपने फ्रांटलाइन ट्रूप जो कि एलएसी और एलओसी पर तैनात हैं उन्हे दुनिया की सबसे घातक और अचूक मानी जाने वाली अमेरिकी रायफल सिगसौर दी है।







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