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सोशल मीडिया की नई गाइडलाइन पर टकराव: मणिपुर में सोशल मीडिया पर टॉक शो चलाने वाले पत्रकार को डीएम ने नोटिस भेजा, केंद्र ने कहा- आपको यह अधिकार नहीं है


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  • मणिपुर में डीएम ने सोशल मीडिया पर टॉक शो के पत्रकार को नोटिस भेजा, केंद्र सरकार ने कहा कि आपके पास अधिकार नहीं है

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नई दिल्ली / इम्फाल4 घंटे पहले

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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इम्फाल के डीएम ने नोटिस वापस ले लिया।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर केंद्र सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। अब इस गाइडलाइन के तहत कार्रवाई और अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई है। हुआ यूं कि मणिपुर में सोशल मीडिया पर टॉक शो चलाने वाले एक पत्रकार को इम्फाल के डीएम आश्रम प्रवीन ने इसी तरह नई गाइडलाइन के तहत नोटिस भेजा।

डीएम को टॉक शो के कुछ पॉइंट्स पर आपत्ति थी। मामला केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तक पहुंच गया तो डीएम को अपना नोटिस वापस लेना पड़ा। मंत्रालय ने साफ कहा कि इस नई गाइडलाइन के तहत आपको, यानी जिले के अधिकारियों को, कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। मंत्रालय ने डीएम के नोटिस को ‘अतिक्रमण करार दिया है।’

सोशल मीडिया के लिए नई गाइडलाइन्स क्या है?

  • सोशल मीडिया सहित बाकी इंटरमीडियरीज को अपने यूजर्स खासकर महिलाओं की ऑफ़लाइन सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखना होगा। किसी की प्राइवेसी खत्म करने वाला कंटेंट, उसका पूरा शरीर या कुछ हिस्सा न्यूड दिखाने वाला या सेक्सुअल एक्टिविटी करते हुए या उसकी तस्वीरों से छेड़छाड़ (मॉर्फ्ड इमेज) वाला कंटेंट शिकायत मिलने के 24 घंटे में डिलीट कर देगा। इसकी शिकायत खुद इंडिविजुअल या फिर उसकी तरफ से नहीं और भी कर सकती है।
  • सोशल मीडिया यूजर्स करोड़ों की तादाद में हैं। सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर इन यूजर्स को अपनी शिकायत के निपटारे के लिए एक फॉर मिले।अगर किसी भी अदालत या सरकारी संस्थान किसी आपत्तिजनक, संदिग्ध ट्वीट या मैसेज के फर्स्ट ओरिजिनेटर की जानकारी मांगती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ये जानकारी देनी होगी।
  • ये व्यवस्था भारत की अखंडता, एकता और सुरक्षा से जुड़े मामलों, सामाजिक व्यवस्था, दूसरे देशों के रिश्तों, रेप और यौन शोषण जैसे मामलों पर लागू होगी।
  • हम बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स के आंकड़े बताएंगे। इन प्लेट प्रदर्शन को शिकायतों के निपटारे के लिए मैकेनिज्म बनाना होगा। एक अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए और उसका नाम भी दिखाना होगा।
  • इस अधिकारी को 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी और इसका निपटारा 15 दिन के भीतर करना होगा।
  • उपयोगकर्ता के सम्मान खासतौर पर महिलाओं के सिलसिले में, अगर किसी की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की जाती है तो शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने होगा।
  • इन कंपनियों को हर महीने एक रिपोर्ट देनी होगी कि कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
  • अगर किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को हटाना है तो उसे ऐसा करने की वजह बतानी होगी और उनकी पक्ष भी सुनना होगा।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में उपयोगकर्ता के पंजीकरण के लिए वॉलेंटरी वेरिफिकेशन मैकेनिज्म होना चाहिए।

इन गाइडलाइन्स के लिए 3 महीने का समय

  • सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज के लिए ये गाइडलाइन 3 महीने बाद लागू होगी ताकि वे अपने मैकेनिज्म में सुधार कर सकें।
  • नियमों और कानूनों का पालन करवाने के लिए भारत में चीफ कंपिलियांस नोडल अफसर, सरकारी एजेंसियों से 24 घंटे संपर्क में रहने वाले नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन, शिकायतों के निपटारे के लिए रेजिडेंट ग्रेवांस ऑफिसर की नियुक्ति होनी चाहिए। ये सभी अफसर भारत में ही रहेंगे।
  • कोई पोस्ट या मैसेज के ओरिजिनेटिंग स्रोत की पहचान करनेनी होगी ताकि हस्तक्षेप, जांच और सजा जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें। ये व्यवस्था भारत की एकता-अखंडता, सामाजिक व्यवस्था, रेप, यौन शोषण और बाल शोषण जैसे मामलों में लागू होगी।
  • वॉलेंटरी वेरिफिकेशन मैकेनिज्म, पोस्ट हटाने की वजह बतानी होगी और यूजर की बात सुनानी होगी।
  • कोर्ट या सरकारी एजेंसी के मुताबिक अगर कोई जानकारी गैरकानूनी है या भारत की एकता-अखंडता, सामाजिक व्यवस्था, दूसरे देशों से रिश्तों से जुड़े कानून के तहत बैन है तो इसे हटाना होगा।

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