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स्व-निखार: उम्र बढ़ने पर महिलाएं ख़ुद के प्रति लापरवाह होती जाती हैं, जिसका असर उनके चेहरे के साथ-साथ शरीर पर भी दिखता है, इसलिए थोड़ी देखभाल अपनी भी करना ज़रूरी है


  • हिंदी समाचार
  • मधुरिमा
  • महिलाएं अपने आप को वृद्ध होने के साथ-साथ लापरवाह हो जाती हैं, जो उनके शरीर के साथ-साथ उनके चेहरे पर भी प्रभाव डालती है, इसलिए उनके लिए खुद का ख्याल रखना महत्वपूर्ण है।

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डॉ। निवेदिता शर्मा, लेखिकाएक घंटा पहले

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  • उम्र का असर आपके मन और शरीर पर एक दिन नहीं दिखता है। कई बरसों की लापरवाही कभी उदासी, कभी वज़न की शक्ल में नज़र आने लगती है। लेकिन जब जागो, केवल सवेरा। तो, आज से ही अपनी दिनचर्या में कुछ चीजों को जोड़कर …

हम में से कितने ही लोग ऐसे होते हैं, जो उम्र के असर को देखते रहते हैं, लेकिन समझ नहीं पाते हैं कि इसका हल कहां ढूंढे। दरअसल, उम्र के साथ ख़ुद के प्रति लापरवाह रवैया और सजगता की कमी मूल कारण हैं। ज़िंदगी आपकी है, स्नेह भी आपके पास ही हैं।

कम्फर्ट ज़ोन से निकेल
आपकी बेसिल और रोज़ एक-सी गुज़रने वाली ज़िंदगी में छोटे-बड़े बदलाव होंगे। जैसे, खाने के बाद टहलते हुए पास वाले आइस पार्लर तक जाइए और आइसक्रीम का आनंद उठाइए। कभी दोपहर में अकेले किसी ऑटो हाउस में कुछ वक़्त गुज़ारिए। नए और अजनबी लोगों से बात करेंगे। अपने कम्फर्ट ज़ोन से निकल कर थोड़ा बाहर की ओर निकलिये।

– कमज़ोर पड़ें, तो क्या …?
आपने तय तो कर लिया कि नएपन की ओर बढ़ेंगे, लेकिन कई बार ऐसे कमज़ोर पल आ जाते हैं, जब दिल चाहता है कि फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाएं। ऐसे पलों के लिए तैयार रहना। ख़ुद पर थोड़ा सख़्ती या लगन को बनाए रखने पर ज़ोर रखिए। उन तमाम स्रोतों को हटा दें, जो कमज़ोर कर सकते हैं, जैसे जंक फूड मंगाने वाले नंबर, मिठाई का सामान आदि।

– तंदुरुस्ती का रखें ख़याल
इस दौर में कोई भी होगा, जिसके जीवन में कोई तनाव नहीं, कोई चिंता नहीं। जाहिर है, कुछ बातें होंगी, जो आपके मन में उलझनेंे बुनती रहती हैं। लेकिन ज़िंदगी को दूसरे नज़रिए से देखना शुरू करना सीखिए। वे कहते हैं कि आपके इर्द-गिर्द ही हैं, जिनसे आप ख़ुशी मिलते हैं। सकारात्मकता की ओर मुड़ें, और उन सब के प्रति आभार प्रकट करें, जो आपको बेहतर महसूस करने में मददगार बनें। पसंद करें, तो अपनी डाय में रोज़ कम से कम एक ऐसी बात का ज़िक्र करें, जो आपको उत्साह से भरता हो।

– किसी से ना कहना
किसी को मत बताइए कि आपने अपनी ज़िंदगी को नए सिरे से संवारने की कोशिशें शुरू की हैं। पहला फायदा तो यह है कि लोग आपको देखकर अटकलें लगना शुरु नहीं करेंगे कि कोई बदलाव नहीं दिख रहा है या नहीं। दूसरा, जब अनजाने ही कोई आपमें दिखने वाले सकारात्मक बदलाव की ओर संकेत करेगा, तो आपको ख़ुद पर और अपने नए रास्तों पर पूरा यक़ीन आ जाएगा। इसके बाद आप और कुछ नए आज़ाद में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएंगे।

– चांड ट्राइएड्स ऐसे करें
अपनी ख़ुशी के लिए भी कुछ कोशिशें करेंगे और यक़ीनन ये कवायदें आपको ही करनी होंगी। नई भाषा या कोई खेल या तैराकी में रुचि लेने से जहां एक नए कौशल सीखने का मौका मिलेगा, वहीं आप ख़ुद के सामने सीखने की नई कठिनाइयों को पाएगी, जो व्यक्तित्व निखार के लिए सर्वश्रेष्ठ रास्ता है।

– माइंडफुलनेस
जीवन में ढर्रे पर हम इसलिए भी चलने लगते हैं क्योंकि जो रोज़ करना ही पड़ता है, उस पर ध्यान देना बंद कर देते हैं। यानी बेख़्याली में दिन बिताते रहते हैं। माइंडफुलनेस इसका हल है। जो भी काम करें, उस पर पूरा ध्यान दें। हो सकता है कि रोज़मर्रा के कामों में भी कुछ नयापन खोज पाएं।

– ख़ुद का ख़्याल
अपने विकास को ख़ुद ठोकर की कोशिश करें। इसके लिए दैनिक शाम को या सप्ताह के अंत में अपने लिए एक वाक्य है। इसमें ख़ुद के लिए शाबाशी हो सकती है, जो नया सीखा उसका ज़िक्र हो सकता है या ज़िंदगी के यूं बदल जाने पर ख़ुशी भी व्यक्त की जा सकती है। यह नाप-जोख केवल आपके लिए होगी, नितांत निजी।

– केवल आप कर सकते हैं
याद करें कि जीवन में महज़ पाँच प्रति घटनाएं स्वतः: घटित होती हैं, 95 प्रति वही होती हैं, जो आप तय करते हैं। इसमें आपके पहले, निर्णय और निर्णय शामिल हैं। कोई तुमसे गलत बात करता है, या कोई मुश्किल परिस्थिति आ जाती है, तो यह तो महज़ घटना हुई, इस पर हमारी प्रतिक्रिया, हमारा चुना रास्ता हम तय कर सकते हैं। इसलिए चाहें, तो किसी भी दौर में, उम्र के किसी भी पड़ाव पर हम अपनी ज़िंदगी का रिबूट का बटन दबा सकते हैं यानी एक बार फिर नए सिरे से ज़िंदगी को संवार सकते हैं।
ये सभी रास्तों का शायद आपको पहले भी पता हो, लेकिन ये पर चलने से हिचकिचा रहे होंगे। तो अब ख़ुद से ग़फ़िल रहना छोड़िए। ख़ुशी और ताज़गी को तलाशिए। अपने आसपास ही मिल जाएगा।

छोटे लेकिन प्रभावी उपाय भी हैं
– ग़र आप सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा वक़्त्त बिताती हैं, तो डिजिटल डिटॉक्स के लिए कम से कम एक दिन रोज़ाना दें। इस दौरान फोन को दूर रखें और कुछ रचनात्मक करें।
– आपको क्या पसंद है? एक सूची बनाइए और कम से कम एक शौक या हॉबी के लिए कुछ वक़्त निकालना शुरू करें। ख़ुद को समझाइए कि थोड़ा स्वार्थी होना बुरा नहीं है।
– देखिए, सब कुछ आप ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं कर सकते। तो कुछ काम, जो मुश्किल लगें, किसी की मदद लेने में संकोच न करें।
– भरपूर नींद लें। रात को देर से सोना और फिर जल्द हीबाज़ी में उठना आपको बीमार और आँसिल बना देता है। सात-आठ घंटे की नींद सोएं, और ताज़गी के साथ दिन की शुरुआत करें।
– हमेशा आप औरतों के लिए कुछ ना कुछ नया बनाते-पकाती रही हैं। सप्ताह में कम से कम एक मर्तबा ख़ुद की पसंद का, ख़ुद के लिए पकाइए।

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