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हंसी थामी में ये आँखें हैं यूं नमी की तरह, स्मरराहट पर अशर


शायरी: उर्दू शायरी (उर्दू शायरी) इस्क् (प्रेम) से लबरेज़ मीठी ज़ुबान है। यह सुनकर अपने आप ही होठों पर हंसी तैर जाती है। इसमें जीवन के सभी रंग मौजूद हैं। इसमें दर्द है, तो ख़ुशी भी है। शायरों ने हर विषय पर क़लम उठाई है। कहीं इसमें क़ुदरत के ख़ूबसूरत नज़रों की बात की गई है, तो कहीं इसमें इंतेज़ार, जुदाई के जज्बात नज़र आते हैं। आज हम शायरों के ऐसे ही निश्चित’तीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए भारत में हुए हैं। शायरों के ऐसे कलाम जिसमें मुस्कुराहटों और इश्क का जिक्र हो, तो उठाइए इस बेशक़ीमती कलाम का लुइदफ़ …





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