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हिंदू कैलेंडर का विशेष महीना: पौष मास में प्रकृति में निहित परिवर्तन होते हैं जिससे जीवन शक्ति बढ़ती है


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3 घंटे पहले

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  • मान्यता: इस महीने की सूर्य की 11 हजार रश्मियों से ऊर्जा मिलती है जिससे पूरे साल से अच्छी तरह से रहती है

सूर्य की शक्तियों वाला पौष का महीना गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस महीने प्रकृति में बहुत से सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। ऐसे में उन बदलावों के लिए तैयार होना जरूरी है। इसलिए पौष माह में जीवन शक्ति और आत्मिक स्तर बढ़ाने का सही समय होता है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं। गणेशिश का कहना है कि इसी तरह पौष माह में कोई शुभ कार्य नहीं होता है, लेकिन भगवान की उपासना की जाती है। खासतौर से सूर्य उपासना के लिए से सबसे अच्छा महीना माना जाता है।

पौष माह का महत्व
हिन्दू पंचांग के दसवें महीने को पौष कहते हैं। इस महीने में हेमंत ऋतु का प्रभाव रहता है इसलिए ठंडक काफी रहती है। इस महीने में सूर्य अपने विशेष प्रभाव में रहता है। महीने में मुख्य रूप से की जाने वाली वानी सूर्य की उपासना ही विशेष फलदायी होती है। मान्यता है कि इस महीने सूर्य 11 हजार रश्मियों के साथ व्यक्ति को ऊर्जा और उत्कृष्ट सेहत प्रदान करता है। पौष मास में अगर सूर्य की नियमित उपासना करे तो व्यक्ति पूरे वर्ष स्वस्थ और संपन्न रहेगा।

11 विशेष व्रत-त्योहार
पौष माह में कृष्णपक्ष में गणेश चतुर्थी, रुक्मणी अष्टमी, सफला एकादशी, स्वरूप द्वादशी, प्रदोष व्रत, शिव चतुर्दशी, श्राद्ध अमावस्या और उसके अगले स्नान-दान की अमावस्या रहेगी। इसके बाद शुक्लपक्ष में मकर संक्रांति, विनाय चतुर्थी, पुत्रदा एकादशी, प्रदोष व्रत और स्नान-दान की पौष पूर्णिमा रहेगी।

ऐसे करें सूर्य की उपासना
रोज सुबह स्नान करने के बाद सूर्य को तांबे के पात्र से जल में रोली और फूल डालकर अर्पित करें।
सूर्य मंत्र ‘मंत्र आदित्याय नमः’ का जाप करें नमक का सेवन कम से कम करें। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।
दैनिक सूर्योदय से पहले उठे और सूर्य पूजा करें।
तिल, गेहूं, गुड़, ऊनी वस्त्र, तांबे के बर्तन और लाल वस्तुओं का दान करें।





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