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हौसले की कहानी: पैर में पटेलिया, शेक चाल-जीप दाैड़ाने का; ब्रेक पर पैर रखते हैं, गाड़ी राेकने हाथ से घुटने काe नीचे दबाते हैं


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भोपाल13 मिनट पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा

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किसान जीवन सिंह

  • शरीर से दिव्यांग, हौसले से बलवान 38 साल के किसान की जिंदादिल कहानी
  • 30 एकड़ जमीन पर खुद करते हैं आसमान, बोवनी और कटाई

कहते हैं- अगर हौंसले बुलंद हों और इरादे मजबूत हों तो शारीरिक विकलांगता भी अपाहिज हो जाती है। यह बात औद्योगिक नगर मंडीदीप से सटे गांव हमी के 38 वर्षीय युवा किसान जीवन सिंह पर बिल्कुल फिट बैठती है। जीवन जब छह वर्ष के थे तो अचानक एक दिन दौड़ते-दौड़ते गिर गए और फिर कभी पैरों पर खड़े नहीं हो पाए। पिता ज्ञान सिंह और माता मुन्नी बाई ने न जाने कितने डॉक्टर और मंदिरों के चक्कर लगाए। अंत में वे ठीक नहीं हुए, क्योंकि पोलियाे के कारण ऐसा हुआ था।

उस समय जीवन के साथ आसपास के इलाके में लगभग आधा दर्जन लोगों को पोलियो हुआ था। उनके बड़े भाई अर्जुन सिंह और भारत सिंह उन्हें पीठ पर बैठाकर स्कूल ले जाते थे। लेकिन, जीवन को ऐसे जीवन रास नहीं मैं। दस साल की उम्र से उन्होंने बड़े भाई के साथ खेत पर जाना शुरू कर दिया। 18 साल की उम्र के बाद ट्रैक्टर के स्टेयरिंग हैंडल के लिए और अब पूरी तरह से खेती-बाड़ी संभालते हैं।

जीवन बताते हैं कि मुझे ट्रैक्टर, जीप चलाने की मनाही नहीं थी। शुरुआत में बहुत कठिनाई आई।]पांव से एक्सीलेटर नहीं दबता था, लेकिन अब सब आसान लगता है। परिवार की 30 एकड़ जमीन है। इस पर हनी, बोवनी और फसल कटने के बाद मंडी ले जाने का काम जीवन करते हैं। बड़ी बात यह है कि जो मंडी में अच्छे-अच्छे ड्राइवर ट्राली नहीं लगा पाते हैं, वहां जीवन बड़ी आसानी से यह काम कर लेते हैं।

सामान्य लाइसेंस नहीं मिला है, इसलिए किसी को साथ बैठाकर चलाते हैं गाड़ी
जीवन ने वाहन चलाने की शुरुआत की और लाइसेंस बन गए तो जवाब मिला कि विकलांग गाड़ी का लाइसेंस बनगा। लेकिन, उन्हें यह मंजूर नहीं था, क्योंकि उन्होंने कभी तीन पहिया विकलांग गाड़ी नहीं चलाई। वे कहते हैं कि उनका टेस्ट ले लिया जाए और अगर वे फेल हो तो लाइसेंस न बने, सफल होने पर उन्हें सामान्य व्यक्ति की तरह लाइसेंस मिलते हैं। लेकिन, नियम इसका अनुमोदन नहीं देते हैं। इस कारण जब कहीं शहर में जाते हैं तो अपने साथ एक लाइसेंस धारी को बैठाना पड़ता है।

18 की उम्र से चला गया गाड़ियां, फिर भी नियमों के कारण अब तक सामान्य लाइसेंस नहीं मिला
हर कोई आश्चर्य से जीवन को देखता है और सवाल करता है कि वे पोलियातेप्ट होने के बाद भी कैसे ट्रैक्टर चले जाते हैं। जीवन ने इसका जवाब देते हुए दैनिक भास्कर को बताया कि एक बार ट्रेलर पर बैठने के बाद अपने पांव को क्लच और ब्रेक पर रख लेते हैं। इसके बाद गियर और हैंडल हाथ में होते हैं। जब क्लच या ब्रेक दबाना हो तो वे फुर से अपने हाथ से पैर को घुटने के पास पकड़कर दबाते हैं। हाथ और पैर की मिश्रित ताकत से ट्रेलर चलता है। ऐसी ही जीप और एसयूवी यानी बड़ी कारें भी चलती हैं।

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