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5 राज्यों में विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग ने पेट्रोल पंपों से 72 घंटे में PM की फोटो वाले होर्डिंग हटाने को कहा; वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर मोदी की फोटो पर TMC को ऐतराज


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नई दिल्लीकुछ ही पल पहले

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चुनाव आयोग ने चुनावी राज्यों में पेट्रोल पंपों पर मोदी के फोटो वाले होर्डिंग्स को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है।

चुनाव आयोग ने चुनाव वाले पांचों राजनों में पेट्रोल पंपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो वाले होर्डिंग्स को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है। आयोग ने ऐसे सभी होर्डिंग्स को 72 घंटे के अंदर हटाने को कहा है। अभी पेट्रोल पंपों पर सरकारी योजनाओं के विज्ञापन में मोदी की फोटो लगी हुई हैं। चुनाव आयोग ने 26 फरवरी को पर्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। इसके साथ ही इन सभी राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है।

TMC ने वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर आपत्ति जताई
इधर, चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कोरोना वैक्सीनेशन के बाद मिलने वाले सर्टिफिकेट पर मोदी की फोटो पर ऐतराज जताया है। टीएमसी सहित विपक्ष ने इसे 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा का प्रचार करार दिया है।

टीएमसी के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने बुधवार को कहा, ‘चुनाव की तारीख घोषित हो चुकी है। ऐसे में कोरोना वैक्सीन सर्टिफिकेट में प्रधानमंत्री की फोटो लगाना ठीक नहीं है। हमारी पार्टी चुनाव आयोग के सामने इस मुद्दे को उठाएगी।

जिन 5 राज्यों में चुनाव हैं, वहां राजनीतिक समीकरण हैं
पश्चिम बंगाल: पहली बार भाजपा मुख्य विपक्षी दल
आप सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं।

TN: चार दशक में जयललिता-करुणानिधि के बिना पहला चुनाव
5 दिसंबर 2016 को जयललिता की मौत के दो साल बाद 2018 में करुणानिधि का भी 94 साल की उम्र में निधन हो गया। करुणानिधि और जयललिता 40 साल तक टीएन की राजनीति के दो ध्रुव रहे। इस दौरान जयललिता 6 बार और करुणानिधि 5 बार टीएम के मुख्यमंत्री रहे। इन आंकड़ों से अंजाजा लगाया जा सकता है कि तमिलनाडु के चुनाव में इस बार कितना खालीपन रहेगा।

असम: NRC के बाद पहली बार चुनाव होंगे
2016 में जब भाजपा ने असम में अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया, तब NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप सबसे बड़ा मुद्दा था। भाजपा ने जोरदार तरीके से इसको लागू करने का मुद्दा उठाया जिसका नतीजा यह रहा कि असम की जनता ने भाजपा को सत्ता में ला दिया, लेकिन भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या इसे लागू करने के बाद आई। NRC को लागू करने का मकसद तेजी लाने की पहचान करना था, लेकिन फाइनल लिस्ट में 19 लाख लोगों के नाम नहीं थे।

केरल: पहली बार लेफ्ट अपना गढ़ बचाने के लिए लड़ेगा
उत्तर-पूर्व में अपना गढ़ त्रिपुरा गंवाने के बाद अब लेफ्ट का आखिरी गढ़ केरल है। बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन में साझेदार कांग्रेस केरल में लेफ्ट के लिए प्रमुख चुनौती है। लेकिन इस बार सत्ता गंवाने से ज्यादा बड़ी चिंता लेफ्ट को अपना कोर वोट बैंक गंवाने की है। केरल में हिंदू समाज अब तक वामपंथी विचारधारा का समर्थक माना जाता था। अब इसी तरह के हिंदू वोटर को भाजपा लव जिहाद के मुद्दे पर लुभाती नजर आ रही है।

पुडुचेरी: कांग्रेस के बागियों के सहारे कमल खिलाने की तैयारी में भाजपा
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस के बागी विधायकों के बूते भाजपा कमल खिलाने की तैयारी में है। यहां पार्टी का एक भी निर्वाचित विधायक नहीं है। पिछली बार भाजपा के तीन नॉमिनेटेड विधायक थे। इससे पहले राज्य में कांग्रेस गठबंधन सरकार शब्द पूरा किए बिना गिर गई। भाजपा ने यहां कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में लाकर सरकार को परेशानी में डाल दिया था। यहां कांग्रेस के 2 मंत्रियों सहित 4 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस ने अपने एक विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया था। वर्तमान में यहाँ राष्ट्रपति शासन लागू है।

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