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5 राज्यों में विधानसभा चुनाव: बंगाल में ममता को भाजपा से पहली बार मिल रही चुनौती, 40 साल में पहली बार तमिलनाडु में करुणा-जया के बिना चुनाव होंगे


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नई दिल्ली40 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल सहित चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कुछ चीजें पहली बार हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में 2011 में सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पहली बार इतनी कड़ी टक्कर मिल रही है। दिलचस्प बात यह है कि टक्कर देने वाली पार्टी 34 साल बंगाल में राज करने वाली वामपंथी विचारधारा की लेफ्ट नहीं, बल्कि दक्षिणपंथी विचाराधीन की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है।

इसी तरह TN में 40 साल में पहली बार करुणानिधि और जयललिता के बिना चुनाव होंगे। असम में NRC लागू होने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है, तो वहाँ केरल में लेफ्ट को एकमात्र लाल गढ़ बचाने की चुनौती भी बहुत पहले ही मिल रही है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पहली बार अल्पमत में आने के कारण कार्यकाल पूरा किए बिना ही कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां कांग्रेस के 2 मंत्रियों सहित 5 विधायकों के भाजपा में शामिल होने से वी नारायणसामी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। इसके साथ ही पहली बार पुडुचेरी में भाजपा के तीन नॉमिनेटेड विधायक बने थे। यही नहीं कांग्रेस के दिग्गजों को तोड़कर भाजपा यहां पहली बार मजबूती के साथ मैदान में दिख रही है। पुडुचेरी में वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू है।

बंगाल: पहली बार भाजपा मुख्य विपक्षी दल, लेफ्ट चर्चा में नहीं
2014 की लोकसभा जीत के बाद भाजपा ने हिंदी भाषी राज्यों में अपने प्रसार पर ज्यादा जोर देना शुरू किया। तब तक कर्नाटक के अलावा भाजपा को ऐसे राज्यों में जीत का इंतजार था, लेकिन 2016 के असम विधानसभा चुनाव में मिली सफलता ने पार्टी के बंगाल मिशन को और मजबूती दी। बंगाल चुनाव में भाजपा को 11% वोट मिले और राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी थी। लेफ्ट 27.3% और कांग्रेस 12.3% के साथ लगभग 40% वोट तो ले आए, लेकिन ममता दीदी को जीतने से मना नहीं किया गया। इस चुनाव में टीएमसी को 45% वोट मिले थे।

जाहिर है कि भाजपा को लेफ्ट और कांग्रेस के मजबूत वोटर्स में एक उम्मीद दिखती है। लेफ्ट और कांग्रेस की निष्क्रियता से खाली हुई जगह को भरने के लिए भाजपा ने काम करना शुरू किया और लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसका नतीजा यह हुआ कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 41% वोटों के साथ भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बन गई। भाजपा को लोकसभा की 42 में से 18 सीटों पर सफलता मिली। यहीं से भाजपा का मिशन बंगाल शुरू हो गया है। आज भाजपा ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

TN: चार दशक में जयललिता-करुणानिधि के बिना पहला चुनाव
5 दिसंबर 2016 को जयललिता की मौत के दो साल बाद 2018 में करुणानिधि का भी 94 साल की उम्र में निधन हो गया। करुणानिधि और जयललिता 40 साल तक टीएन की राजनीति के दो ध्रुव रहे। इस दौरान जयललिता 6 बार और करुणानिधि 5 बार टीएम के मुख्यमंत्री रहे।

इन आंकड़ों से अंजाजा लगाया जा सकता है कि TN के चुनावों में इस बार कितना खालीपन रहेगा। जयललिता और करुणानिधि दोनों ही तमिल फिल्म उद्योग से आए थे। इस बार तमिल सिनेमा से एकमात्र किरदार कमल हासन हैं, लेकिन उनका असर जयललिता या करुणानिधि जैसा नहीं है।

असम: NRC के बाद पहली बार चुनाव होंगे
2016 में जब भाजपा ने असम में अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था, तब NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप सबसे बड़ा मुद्दा था। भाजपा ने जोरदार तरीके से इसको लागू करने का मुद्दा उठाया जिसका नतीजा यह रहा कि असम की जनता ने भाजपा को सत्ता में ला दिया, लेकिन भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या इसे लागू करने के बाद आई। NRC को लागू करने का मकसद तेजी लाने की पहचान करना था, लेकिन अंतिम लिस्ट में 19 लाख लोगों के नाम नहीं थे।

इनमें से ज्यादातर वे लोग थे जिनका दावा था कि वे असम के मूल निवासी हैं। राजनीतिक तौर पर भाजपा के लिए यह एक बड़ा झटका था, क्योंकि वही लोग असम में भाजपा के कोर वोट बैंक थे। इस चुनाव में भाजपा को अपने पुराने वादे पर सही तरीके से अमल न कर पाने का खामियाजा भुगतने का डर सता रहा है तो दूसरी तरफ NRC में हुई लापरवाही ने कांग्रेस को सुधार का मौका दे दिया है।

केरल: पहली बार लेफ्ट अपना गढ़ बचाने के लिए लड़ेगा
उत्तर-पूर्व में अपना गढ़ त्रिपुरा गंवाने के बाद अब लेफ्ट का आखिरी गढ़ केरल है। बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन में साझेदार कांग्रेस केरल में लेफ्ट के लिए प्रमुख चुनौती है। लेकिन इस बार सत्ता गंवाने से ज्यादा बड़ी चिंता लेफ्ट को अपना कोर वोट बैंक गंवाने की है। केरल में हिंदू समाज अब तक वामपंथी विचारधारा का समर्थक माना जाता था। अब इसी तरह के हिंदू वोटर को भाजपा लव जिहाद के मुद्दे पर लुभाती नजर आ रही है। लव जिहाद का मुद्दा कुछ हद तक केरल में ईसाई वेटरों पर भी काम कर सकता है।

यहाँ लगभग 55% हिंदू, 27% ईसाई और 18% मुस्लिम किन्नर हैं। संघ परिवार और भाजपा ने लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी है। उसकी कोशिश है कि वह इस विधानसभा चुनाव में एक असरदार विपक्ष की तरह राज्य में अपनी जगह बना ले। ऐसा होता है तो बंगाल की तरह अगले चुनाव तक भाजपा इस लाल गढ़ में सेंध लगाने में सफल हो सकती है। हाल ही में मेट्रो मैन के नाम से प्रसिद्ध ई श्रीधरन भाजपा में शामिल हुए हैं। पार्टी उनके चेहरे को चुनाव में भुनाने का पूरा प्रयास करेगी।

पुडुचेरी: कांग्रेस के बागियों के सहारे कमल खिलाने की तैयारी में बी जे पी
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस के बागी विधायकों के बूते भाजपा कमल खिलाने की तैयारी में है। यहां पार्टी का एक भी निर्वाचित विधायक नहीं है। पिछली बार भाजपा के तीन नॉमिनेटेड विधायक थे। इससे पहले राज्य में कांग्रेस गठबंधन सरकार शब्द पूरा किए बिना गिर गई।

पार्टी के पांच विधायकों और एक सहयोगी DMK विधायक के इस्तीफे के कारण सरकार बहुमत के आंकड़े से दूर हो गई और फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी को इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा ने यहां कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में लाकर सरकार को परेशानी में डाल दिया था। यहां कांग्रेस के 2 मंत्रियों सहित 4 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस ने अपने एक विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया था। वर्तमान में यहाँ राष्ट्रपति शासन लागू है।

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