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8294 करोड़ के निवेश का बजट: सरकार का स्थापना व्यय 10.85% बढ़ा; आधा से अधिक बजट वेतन-भत्ते, पेंशन और ब्याज पर खर्च, जनता के लिए 48% राशि होगी


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भोपाल6 घंटे पहले

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  • इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 44,152 करोड़ रुपये बढ़ाई गई है, कृषि में 18,577 करोड़ का इजाफा
  • केंद्रीय करों में एमपी की हिस्सेदारी 52,247 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि पिछले साल इस मद में 46,025 करोड़ रुपये मिले थे

शिवराज सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 8294 करोड़ के निवेश के बजट का बजट पेश किया है। विशेष बात यह है कि प्रस्तावित बजट में स्थापना व्यय सरकर का स्थापना व्यय 10.85% बढ़ गया है। बजट की बारह से ज्यादा राशि कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, पेंशन और सरकार द्वारा लिए जा रहे लोन का ब्याज चुकाने में खर्च हाए।]जबकि 48% राशि राज्य के विकास, सरकारी योजनाओं पर खर्च होगी।

बजट में किए गए प्रावधानों के मुताबिक राज्य के कुल बजट में अब 2,41, 375 करोड़ रुपये पहुंच गए हैं। जबकि राजकीय सत्र की बात करें तो यह 50,938 करोड़ रुपये है। यदि मौजूदा वित्तीय वर्ष (2020-21) से तुलना करें तो सरकार ने कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, पेंशन और ब्याज पर बजट की 41.07% राशि खर्च की थी। नए वित्तीय वर्ष के लिए इस मद में यह राशि बढ़ कर 51.92% प्रस्तावित की गई है। यानि शेष 48% राशि ही जनता के हिस्से में आई।

मध्य प्रदेश में 31 मार्च 2021 तक की स्थिति में 1.99 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है।

मध्य प्रदेश में 31 मार्च 2021 तक की स्थिति में 1.99 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है।

इस बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 44,152 करोड़ रुपए बढ़ाई गई है। जबकि कृषि के बजट में 18,577 करोड़ का इजाफा किया गया है। इसी तरह केंद्रीय करों में एमपी की हिस्सेदारी 52,247 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि पिछले साल इस मद में 46,025 करोड़ रुपये मिले थे।
केंद्र सेस डालकर होगा 4542 करोड़ रुपये
इस बारे में वित्त विभाग के मुताबिक केंद्र से सरकार से मौजूदा वित्तीय वर्ष में 8214 करोड़ रुपये मिलना था, लेकिन अभी तक 4185 करोड़ रुपये ही मिल पाया है। विभाग का कहना है कि कोरोना के कारण केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति गड़बड़ा गई थी। ऐसे में केंद्र ने आश्वासन दिया है कि शेष राशि सेस लगाकर दी जाएगी।
लगातार बढ़ता कर्ज
मध्य प्रदेश में 31 मार्च 2021 तक की स्थिति में 1.99 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है। बावजूद इसके अगले वित्तीय वर्ष के बजट में 49,400 करोड़ रुपये का ऋण प्रस्तावित किया गया है। इसको लेकर वित्त विभाग के अफसरों से पूछा गया तो उनका कहना है कि सरकार को जनहित में कई फैसले लेने पड़ते हैं, इसलिए खर्च कम करना संभव नहीं हाे पाता है, इसलिए केंद्र सरकार की अनुमति से सरकार कर्ज लेती है।
2020-21 में GST व अन्य केंद्रीय करों से 27,826 करोड़ मिले
सरकार को केंद्रीय करों (जीएसटी, सेल टैक्स, एंट्री टैक्स और इंटरटेंटमेंट टैक्स) से मौजूदा वित्तीय वर्ष में 27,826 करोड़ रुपए मिले। जबकि आगामी वित्तीय वर्ष में 36% राशि बढ़ाकर इसे 37,740 करोड़ रुपये प्रिस्टिवेट किए गए हैं। जबकि सरकार ने केंद्र से 61 हजार करोड़ रुपये की मांग की थी।
स्टॉम्प और पंजीकरण शुल्क 1,495 करोड़ की वृद्धि
सरकार ने अनुमान लगाया है कि नए साल में स्टॉम्प व पंजीकरण शुल्क से 6,495 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जबकि मौजूद वित्तीय वर्ष में 5 हजार करोड़ रुपये सरकार को मिले। इसी तरह राज्य उत्पाद शुल्क में मौजूदा वर्ष से 3,109 करोड़ रुपये अधिक मिलने का अनुमान लगाया गया है।

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