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SBI और ICICI बैंक टॉप ऑन: 10 साल में बैंकों ने 8.83 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को फिर से जारी किया


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मुंबई8 मिनट पहले

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निजी बैंकों में सबसे ज्यादा कर्ज का ऑफ डिपॉजिट ऑफ आईसीआईसीआई बैंक ने किया है। इस तरह 10 हजार 942 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है। एक्सिस बैंक ने 10 हजार 169 और एचडीएफसी बैंक ने 8 हजार 254 करोड़ रुपये के कर्ज को रद्द किया है

  • सरकारी बैंकों ने वर्ष 2010 से कुल 6.67 लाख करोड़ रुपये के कर्जों को चुकता किया है
  • निजी क्षेत्र के बैंकों ने इसी दौरान 1.93 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को चुकता किया है

भारतीय बैंकों ने पिछले 10 वर्षों में 8.83 लाख करोड़ रुपये के कर्जों को चुकता किया है। सरकारी बैंकों में सबसे अधिक राईट ऑफ किया गया है। इसमें एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक टॉप पर हैं। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक ने दी है।

राइट ऑफ मीन थोडा बहुत रिसिशन की गुंजाइश

राइट ऑफ का मतलब यह है कि ऐसा कर्ज जिसकी थोड़ी बहुत वसूली संभव है। यानी वसूली हुई तो ठीक नहीं हुई तो बहुत ठीक है। रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंकों ने साल 2010 से कुल 6.67 लाख करोड़ रुपये के कर्जों को चुकता किया है। यह कुल कर्जों के रूप में करीब 76% है। निजी क्षेत्र के बैंकों ने इसी दौरान 1.93 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को चुकता किया है।

निजी बैंकों का 21 पर्सेंटेज बकाया है

निजी बैंकों का कुल डिपाजिट 21% है। विदेशी बैंकों ने इसी दौरान 22 हजार 790 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकता किया है। यह कुल तीन% हिस्सा है। वित्त वर्ष 2019-20 में इन बैंकों ने कुल 2.37 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को चुकता किया है। यह पिछले 10 वर्षों के बदले का एक चौथाई हिस्सा है। इसमें से 1.78 लाख करोड़ रुपए सरकारी बैंकों का है जबकि 53 हजार 949 करोड़ रुपए निजी बैंकों का है।

एसबीआई ने सबसे ज्यादा राईट ऑफ किया

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने सबसे ज्यादा राइड ऑफ किया है। इस दौरान वित्त वर्ष 2020 में 52 हजार 362 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाना पड़ा है। इसके बाद भारतीय ओवरसीज बैंक ने 16 हजार 406 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 15 हजार 886 करोड़ और यूको बैंक ने 12 हजार 479 करोड़ रुपए के कर्ज को चुकता किया है।

आईसीआईसीआई बैंक निजी बैंकों में शीर्ष पर

निजी बैंकों में सबसे ज्यादा कर्ज का ऑफ डिपॉजिट ऑफ आईसीआईसीआई बैंक ने किया है। इस तरह 10 हजार 942 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है। एक्सिस बैंक ने 10 हजार 169 और एचडीएफसी बैंक ने 8 हजार 254 करोड़ रुपये के कर्ज को रद्द किया है। कर्ज को चुकाने के लिए बैंकिंग प्रणाली में एक तनाव भी है। क्योंकि यह पैसा वापस नहीं आता है और फिर इसके लिए बैंकों को दूसरा रास्ता आपका बनाना होता है।

इस तरह के खातों के लिए बैंकों को अतिरिक्त प्रोविजन करना होता है। यानी इतना पैसा उन्हें साइड में अलग से रखना होता है। ज्यादातर साल के पिछले बकाया होने के कारण उम्मीद के मुताबिक कर्ज की रिकवरी नहीं हो पाई थी।

ग्राउंड एनपीए 8.2 पर्सेंट पर

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों का कुल बुरा फंसा कर्ज (ग्राउंड एनपीए) मार्च 2019 में 9.1% था, जो मार्च 2020 में 8.2% रहा है। इसमें से ज्यादातर योगदान इसी तरह के हैं। बैंकों के एनपीए में ज्यादा हिस्सा 5 करोड़ रुपए से ज्यादा वाले लोन हैं। कुल एनपीए में इनका हिस्सा करीबन 80% है।





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