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UP पंचायत चुनाव: मई से पहले पंचायत चुनाव कराने के लिए सरकार को दिखानी होगी तेजी, जानिए क्यों?


यूपी पंचायत चुनाव 2021 को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म है। (सांकेतिक चित्र)

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव: आरक्षण की सूची जारी होने के बाद लिस्ट राज्य निर्वाचन आयोग को दे दी जाएगी। राज्य सरकार आयोग को चुनाव की एक संभावित समयबानी भी उपलब्ध करायेगी। इसके बाद ही निर्वाचन आयोग के चुनाव की अधिसूचना जारी होगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (पंचायत चुनाव 2021) कराने की जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उससे तो यही लगता है कि चुनाव अप्रैल के अंत में या फिर मई के पहले सप्ताह तक ही संभव हो पाएगा। चुनाव कराने की प्रक्रिया का सबसे मुश्किल काम सरकार (योगी सरकार) ने कर लिया है लेकिन, एक और मुश्किल काम उसके शब्दों में है। इसके होने में बहुत देरी होगी, चुनाव की तारीखें उतनी ही आगे बढ़ती जायेंगी। इन कार्यों में आरक्षण है। यानी सी सीट रिजर्व कौन होगा? और कौन सी जनरल? इसे तय करने के बाद ही चुनाव की दिशा में निर्वाचन आयोग बढ़ सकता है।

अभी तक ये हो गया है काम लेकिन …

अभी तक की तैयारियों को देखें तो पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का काम कर लिया है। इसके बाद अब इन क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। पंचायती राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि आरक्षण के काम में और तेजी दिखानी होगी।

आरक्षण तय करने में कई चरण फिर से …

उन्होंने बताया कि आरक्षण तय करने के लिए कई चरणों पर काम करना पड़ता है। इसका पहला चरण तो यही है कि यूपी शासन की ओर से आरक्षण करने के लिए शासनादेश जारी हो। शासनादेश जारी होने के बाद सीटों का आरक्षण तय करने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा। बहुत समय इसलिए क्योंकि सभी जिलों से आबादी का हिसाब-किताब विभाग को भेजा जाता है। इसके आधार पर फिर से आरक्षण की व्यवस्था की जाती है। इसके बाद विभाग इसपर आपकी तूत्तियां मांगता है। आपत्तियां मांगने और उसकी बसारे की समय सीमा भी होती है। ऐसे में आरक्षण का शासनादेश जारी होने के बाद से लिस्ट जारी होते-होते एक महीने का समय बीत जाएगा।

… केवल जारी हो सकेगी अधिसूचना

उन्होंने बताया कि आरक्षण की सूची जारी होने के बाद लिस्ट राज्य निर्वाचन आयोग को दे दी जाएगी। साथ ही राज्य सरकार आयोग को चुनाव की एक संभावित समय सारणी भी उपलब्ध करायेगी। इसके बाद ही निर्वाचन आयोग के चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। अधिसूचना जारी होने के कम से कम एक सप्ताह के बाद ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो फाउंडगी।

मार्च में हो जाओ चुनाव तो अफसर बधाई के पात्र हैं

अब मान लीजिये फरवरी में किसी तारीख को आरक्षण का जीओ जारी हो जाए तो लिस्ट जारी होते-होते मार्च का दूसरा या तीसरा हफ्ता आसानी से आ जाएगा। इसी तरह बजट सत्र और होली की शिक्षाओं में भी होगा। ऐसे में आज की तारीख में भी अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह से पहले पंचायत चुनाव होने की संभावना कम ही दिखती है। वैसे अभी तक की चर्चा के मुताबिक मार्च में चुनाव कराने की सरगमी दिख रही है। यदि ऐसा हो तो वास्तव में अफसर जीत के पात्र होंगे।







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